Bihar Caste Census 2022 | बिहार जातीय जनगणना 2022 In Hindi Full Detail

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भारत में जनगणना का क्या है इतिहास? ( Bihar Caste Census 2022)

भारत में पहली जनगणना 1867 से 1872 के 5 वर्षों के बीच हुई थी जिसे 18 72 की जनगणना भी कहा जाता है । यह जनगणना ब्रिटिश शासकों के द्वारा करवाई गई थी इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश नियंत्रण क्षेत्र में उसके आकार रचना अथवा जनसंख्या की विशेषता का पता लगाने के लिए किया गया था परंतु यह जनसंख्या पूरे ब्रिटिश क्षेत्र में नहीं की गई थी।

फिर भी 1872 की पहली जनगणना से नागरिकों से संबंधित विभिन्न विशेषताओं एवं आकंडों के आधार पर सूचनाएं का जो भंडार प्राप्त हुआ वह विश्वसनीय एवं सुनियोजित नियोजन के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1881 में एक जनगणना पूरे देश के लिए एक साथ करवाई गई थी तब से हर 10 साल में यह जनगणना बिना व्यवधान के की जा रही है परंतु 16वीं  जनगणना में कोविड-19 के कारण से नहीं हो पाया जो वर्ष 2021 में होना था।

जनगणना क्यों की जाती है? ( Bihar Caste Census 2022)

देश में नागरिकों को किसी भी योजना का लाभ देने के लिए उसकी पूरी सांख्यिकी की आवश्यकता होती है। जिसके लिए सरकार जनगणना कराती है जिसके आधार पर लोगों के लिए सशक्त एवं नीतिगत योजना तैयार की जाती है अर्थात देशवासियों की संख्या जाने बिना विकास को गति देने की कल्पना नहीं की जा सकती है यही कारण है कि जनगणना का काम बड़े ही व्यापक स्तर पर किया जाता है जिसके प्राप्त परिणाम बहुउद्देशीय एवं बहुआयामी होते हैं इस तरह देखा जाए तो जनगणना का हर नागरिक जीवन बहुत महत्व है। जनगणना कराने के कारण को निम्न बिंदु से समझा जा सकता है।


• जनसांख्यिकीय सूचना प्राप्त करने के लिए
• आर्थिक गतिविधि संबंधी सूचना प्राप्त करने के लिए साक्षरता और शिक्षा की दर को जानने के लिए
• आवास और घरेलू सुविधा की सूचना के लिए
• शहरीकरण की सूचना
• प्रजनन और मृत्यु दर की सूचना
• अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के बारे में सूचना
• धर्म ,भाषा, विकलांगता, सामाजिक- सांस्कृतिक विविधता, की सूचना प्राप्त करें
• रोजगार दर और बेरोजगारी की दर की सूचना प्राप्त करने के लिए।


जनसंख्या के पात्रों से निर्वाचन क्षेत्रों ,संसदीय क्षेत्र, विधायी क्षेत्र, पंचायती और स्थानीय निकायों के परिसीमन तथा उससे संबंधित आरक्षण की व्यवस्था तैयार की जाती है।


जनगणना केवल गिनती पर नहीं होती बल्कि इससे भारत की आयु महिलाओं का प्रतिशत अनुपात संबंधी जानकारी मिलती है।


जनगणना के माध्यम से आवासीय गणना में आवास का प्रकार सुविधाएं और परिवारों की परिसंपत्तियों की सूचना भी एकत्रित की जाती है विभिन्न आंकड़ों के विश्लेषण विश्लेषण से देश की जनसंख्या के विविध पहलुओं को समझने में मदद मिलती है।

भारत में पहली बार 1881 में जनगणना हुई थी. पहली बार जब जनगणना हुई थी, तब भारत की आबादी 25.38 करोड़ थी।तब से हर 10 साल पर जनगणना हो रही है.- 1931 तक जाति के आधार पर भी जनगणना के आंकड़े जुटाए गए. 1941 में भी जातिवार आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन इसे जारी नहीं किया गया था.- आजादी के बाद 1951 में जनगणना हुई थी. तब सरकार ने तय किया था कि सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आंकड़े ही जुटाए जाएंगे. इसके बाद से सिर्फ एससी और एसटी के आंकड़े जारी होते हैं.

बिहार में जातीय जनगणना  चर्चा में क्यों है ? ( Bihar Caste Census 2022 )

बिहार में 1 जून, 2022 को जातीय जनगणना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बिहार में सभी धर्मों की जातियों और उपजातियों की गणना होगी।

बिहार में जातीय जनगणना के  प्रमुख कारण: ( Bihar Caste Census 2022 )

बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार ने कहा कि जाति आधारित गणना कराने का उद्देश्य लोगों को आगे बढ़ाना है ताकि राज्य का कोई भी व्यक्ति उपेक्षित न रहे। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग , एससी एसटी और सामान्य कोटी के जाति के लोगों का सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास करना है।

अनुच्छेद 246 के अनुसार जनगणना केंद्र सरकार का विषय है लेकिन राज्य सरकार में सहयोगी की भूमिका में रहती है अतः एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना के लिये केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया था, किंतु राष्ट्रीय स्तर पर इसके आयोजन से इनकार के बाद राज्यस्तर पर करने का निर्णय लिया गया है।

23 अगस्त, 2021 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मिलकर देश में जातीय जनगणना कराने का आग्रह किया था, साथ ही इससे पहले भी देश में जातीय जनगणना कराने के लिये बिहार विधानसभा से वर्ष 2019 तथा 2020 में दो बार प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।

नीतिश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल केंद्र सरकार से जातीय जनगणना के लिए जो क्यों मिला था? ( Bihar Caste Census 2022)

उत्तर : क्योंकि अनुच्छेद 246 के अनुसार जनगणना केंद्र सरकार का विषय है लेकिन राज्य सरकार में सहयोगी की भूमिका में रहती है अतः एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना के लिये केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया था, किंतु राष्ट्रीय स्तर पर इसके आयोजन से इनकार के बाद राज्यस्तर पर करने का निर्णय लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि जातीय जनगणना आखिरी बार वर्ष 1931 में की गई थी, हालाँकि वर्ष 2011 में सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना आयोजित की गई थी, किंतु केंद्र सरकार द्वारा इसके जातीय आंकड़ों को जारी नहीं किया गया था।

आखिरी बार 1931 में हुई थी जातिगत जनगणना, अब बिहार में होगी… जानिए उस वक्त के क्या थे आंकड़ें? ( Bihar Caste Census 2022)

Caste Based Census: बिहार सरकार ने प्रदेश में जातीय जनगणना करने का फैसला लिया है. अब भारत में कई सालों बाद ऐसा होगा कि जाति के आधार पर जनसंख्या की गणना की जाएगी.

देश में लंबे समय से जाति आधारित जनगणना की मांगी की जा रही थी और अब बिहार में इसे लेकर सहमति बन गई है. दरअसल, बिहार में जातीय जनगणना (Caste Wise census) को लेकर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई थी, जिसमें जाति आधारित जनगणना को लेकर फैसला लिया गया है. अब सर्वसम्मित के बाद नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना को मंजूरी दे दी है और बिहार सरकार अपने खर्चे पर जनगणना करवाई जाएगी. जातीय जनगणना (Caste Based Census In Bihar) की मंजूरी को इसलिए अहम माना जा रहा है कि क्योंकि देश में कई सालों से कभी भी जाति के आधार पर जनसंख्या की गणना नहीं की गई है. लेकिन, इसकी मांगी काफी वक्त से हो रही थी.

ऐसे में जानते हैं कि आखिरी बार जातिगत जनगणना कब की गई थी और उस वक्त की जातीय जनगणना में जाति पर आधारित क्या डेटा सामने आया था. तो जानते हैं जातीय जनगणना से कुछ खास बातें और जाति आधारित डेटा, जो काफी रोचक है।

आखिरी बार कब हुई थी जातीय जनगणना? ( Bihar Caste Census 2022)

बता दें कि जातीय जनगणना आजाद भारत में एक बार भी नहीं है. आखिरी बार साल 1931 में ब्रिटिश हुकुमत के दौरान ही जाति के आधार पर जनसंख्या के आंकड़े इकट्ठे किए गए थे. इसके बाद कभी भी जाति के आधार पर जनसंख्या के आंकडे़ जारी नहीं हुए हैं. वैसे तो सबसे पहले 1881 में जनगणना हुई थी और उसके बाद हर 10 साल में जनगणना होती गई,

लेकिन 1931 के बाद जाति के आधार पर जनगणना के आंकड़ें सामने नहीं आए. 1931 के बाद 1941 को जाति के आधार पर जनगणना तो हुई थी, लेकिन इसके आंकड़ें सार्वजनिक नहीं किए गए. इसके बाद भारत आजाद हो गया और फिर 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना करवाई गई।हालांकि, इस दौरान ही ये फैसला ले लिया गया था कि अब जाति के आधार पर जनसंख्या की गिनती नहीं होगी.

लेकिन, जनगणना में सिर्फ एससी और एसटी के आंकड़ें जारी होते हैं और अन्य जातियों की कोई जानकारी नहीं दी जाती है. लेकिन, अगर बिहार में जाति के आधार पर जनगणना होती है तो आजाद भारत में पहली बार ऐसा होगा.

1931 की जातीय जनगणना के क्या थे आंकड़े? ( Bihar Caste Census 2022)

1931 में आखिरी बार जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी हुए थे. बता दें कि उस समय अलग अलग राज्य के स्थान पर अलग अलग रियासते थीं और रियासतों के आधार पर आंकड़ें जारी किए गए थे. जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा एक रियासत थी. इसके अलावा कई जातियों के आधार पर आंकड़ें जारी किए गए थे. 1931 की जनगणना के डेटा के अनुसार,


1. सबसे ज्यादा ग्वाला (अहीर) का आंकड़ा था, जिनकी आबादी 34.55 लाख से ज्यादा थी.
2. खबर के अनुसार, इसके बाद 21 लाख से ज्यादा ब्राह्मण थे
3. करीब 9 लाख भूमिहार ब्राह्मण थे।
4. साथ ही 14.52 लाख कुर्मी,
5. 14.12 लाख राजपूत,
6. 12.96 लाख हरिजन जाति के लोग थे।
7.  वहीं, 12.90 लाख दोसाध,
8. 12.10 लाख तेली,
9. 10.10 लाख खंडैत
10.  9.83 लाख जोलाहा जाति
11. . 4 लाख से ज्यादा धोबी और
12. 2 लाख से ज्यादा बनिया थे.

बिहार का क्या था हाल? ( Bihar Caste Census 2022)

अगर बिहार की बात करें तो अविभाजित बिहार की कुल आबादी 3 करोड़ 85 लाख थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, उसमें सवर्णों की संख्या 47 लाख 92 हजार 764 थी। हिन्दुओं में यादवों की संख्या 1931 में भी सबसे अधिक थी।

जातीय जनगणना में बिहार सरकार खर्च कहां से करेगी एवं कुल कितना खर्च आएगा जाति आधारित गणना के क्रियान्वयन पर करीब ₹500 करोड़ का खर्चा आएगा जो राज्य सरकार आकस्मिक निधि से मिलेगी। इस दौरान आर्थिक सर्वे कराने की भी कोशिश की जाएगी।

जाति आधारित जनगणना पूरा करने का लक्ष्य कब तक रखा गया है जाति आधारित जनगणना पूरा करने का लक्ष्य फरवरी 2023 तक रखा गया है समय-समय पर इसकी प्रगति रिपोर्ट जारी की जाती रहेगी।

जाति आधारित गणना के लिए 8 स्तर पर अधिकारियों व कर्मियों एवं निगरानी का तंत्र जाति गणना से जुड़े आंकड़े का संग्रहण मोड में मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा।

किन कर्मियों की जाति आधारित जनगणना में मदद ली जाएगी ? ( Bihar Caste Census 2022)

शिक्षाकर्मी, आंगनवाड़ी सेविका, मनरेगा कर्मी जीविका समूह के सदस्य, लिपिक, जाति आधारित गणना करेंगे

प्रगणक के रूप में कौन-कौन होंगे प्रगणक द्वारा प्राप्त सूचना किसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। – Bihar Caste Census 2022

प्रगणक : शिक्षाकर्मी, आंगनवाड़ी सेविका, मनरेगा कर्मी जीविका समूह के सदस्य, लिपिक, जाति आधारित गणना करेंगे। प्रगणक द्वारा सूचना किसी को साझा नहीं किया जाएगा सूचना केवल अपने उच्च अधिकारियों को दिया जाएगा।

जाति आधारित जनगणना में नागरिकों के कर्तव्य – Bihar Caste Census 2022

व्यक्ति को अपने से संबंधित है सभी सूचना प्रगणक को सही रूप में देना चाहिए किसी भी प्रकार की बनावट इस सूचना को बचना चाहिए।

भारत के जनगणना आयुक्त की सूची : – Bihar Caste Census 2022

1881 की जनगणना से 1941 तक जनगणना आयुक्त और उसके बाद 1949 से भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त, निम्न है।


1. 1881 श्री डब्ल्यू डब्ल्यू प्लाडेन
2. 1891 श्री जे ए बैंस
3. 1901 श्री एच.एच. रिस्ले और ई.ए. गायतो
4. 1911 श्री ई. ए. गायतो
5. 1921 श्री जे. टी. मार्टेन
6. 1931 श्री जे. एच. हटन
7. 1941 श्री एम. डब्ल्यू. एम. ये
8. 1949 श्री एम. डब्ल्यू. एम. येट्स
9. 1949 – 1953 श्री आर ए गोपालस्वामी
10. 1958 – 1968 श्री अशोक मित्र
11. 1968 – 1973 श्री ए. चंद्रशेखर
12. 1973 – 1977 श्री आर.बी. चरिक
13. 1977 – 1983 श्री प. पद्मनाभा
14. 1983 – 1989 श्री विजय एस वर्मा
15. 1989 – 1994 श्री ए. आर. नंदा
16. 1994 – 1999 डॉ एम. विजय
17. 1999 – 2004 श्री जे. के. बंथिया
18. 2004 – 2009 श्री डी.के. सीकरी
19. 2009 – 2016 डॉ. सी. चंद्रमौली
20. 2016 – 2019 श्री शैलेश
21. 2019 – डॉ विवेक जोशी

भारत में दशकीय जनगणना कराने की जिम्मेदारी किस मंत्रालय की है? – Bihar Caste Census 2022

दशकीय जनगणना के संचालन की जिम्मेदारी भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पास है। यह ऐतिहासिक हित का हो सकता है कि यद्यपि भारत की जनसंख्या जनगणना एक प्रमुख प्रशासनिक कार्य है।

भारतीय जनगणना में कौन-कौन से प्रश्न शामिल किए जाते हैं – Bihar Caste Census 2022

CENSUS QUESTIONS 2011
2011: CENSUS QUESTIONS TOTAL 29
1. Name of person
2. Relationship to head
3. Sex
4. Date of Birth and Age
5. Current Marital Status
6. Age at marriage
7. Religion
8. Scheduled caste (SC)/Scheduled Tribe(ST)
9. Disability
10. Mother Tongue
11. Other Language known
12. Literacy Status: Literate -1/ Illiterate -2
13. Status of attendance
14. Highest educational level attained
15. Worked any time during last year
16. Category of the economic activity
17. Occupation
18. Nature of the industry, trade or services
19. Class of workers
20. Non-economic activity
21. Seeking or available for work
22. Travel to place of work
(i) one way distance
 (ii) mode of travel
23•Fill for person born outside this village/town, Birth Place, If within India, write the present name of village/town, district and State. if outside India, write the present name of the country
24•Migration characteristics
 Fill for person who has come to this village/town from elsewhere
Place of last residence
    (a) if within India
    (b) at the time of migration
25•Reason for migration
26•Duration of stay in this village/town since migration
27•Fertility Particulars – Children surviving
Daughters(s)
Son(s)
 28•Children ever born alive
Daughters(s)
Son(s)
29• Number of children born alive during last one year
 Daughters(s)
Son(s)

बिहार में रहने वाले विभिन्न जातियों की सूची: – Bihar Caste Census 2022

Bihar Caste List: बिहार राज्य में 204 से अधिक जातियों का निवास है। बिहार सरकार ने इन्हें 5 श्रेणी में वर्गीकृत किया है जो निम्न है। इसके अतिरिक्त एक अन्य श्रेणी ईडब्ल्यूएस EWS की बनाई गई है
1. BC =  Backward Class “पिछड़ा वर्ग” = 33
2. EBC = Extermely Backward Class  “अत्यंत पिछड़ा वर्ग” = 113
3. ST =  Scheduled Tribes  “अनुसूचित जनजाति” = 29 दलित एवं महादलित कहा
4. SC = Scheduled Castes “अनुसूचित जाति” = 22 दलित एवं महादलित कहा
5. GEN = General Caste “सामान्य जाती” = 7
6. EWS = ECONOMICALLY WEAKER SECTION “आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग” = 9

बिहार में रहने वाले विभिन्न जातियों की सूची: जातियों के नाम के साथ – Bihar Caste Census 2022
BC = Backward Class “पिछड़ा वर्ग” बिहार में अन्य पिछड़ा वर्ग को BC II  भी लिखा जाता है जिसमें लगभग 33 जातियाँ आती है जो निम्न है – Bihar Caste Census 2022EBC = Extermely Backward Class “अत्यंत पिछड़ा वर्ग” बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग को BC I भी लिखा जाता है।इसमें लगभग 113 जातियाँ है जो निम्न है। – Bihar Caste Census 2022
1. विलोपित 2. कागजी
3. कुशवाहा (कोईरी) 4. कोस्ता 5. गद्दी 6. घटवार
7. चनउ 8. जदुपतिया 9. जोगी (जुगी) 10. नालबंद (मुस्लिम) 11. परथा
12. बनिया-(सूढी, मोदक/मायरा, रोनियार, पनसारी, मोदी, कसेरा, केशरवानी, ठठेरा, कलवार (कलाल/एराकी), (वियाहुत कलवार), कमलापुरी वैश्यल, माहुरीवैश्यर, बंगी वैश्य(बंगाली बनिया), बर्नवाल, अग्रहरि वैश्य, वैश्य पोद्दार, कसौधन, गंधबनिक, बाथम वैश्य, गोलदार(पूर्वी / पश्चिम चंपारण), कमलापुरी वायल
13. यादव-(ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप, लक्ष्मी नारायण गोला 14. रौतिया 15. शिवहरी 16. सोनार 17. सूत्रधार 18. सुकियार 19. ईसाई धर्मावलंबी (हरिजन)
20. ईसाई धर्मावलंबी (अन्य पिछडी जाति) 21. कुर्मी
22. भाट/भट/ब्रह्मभट्ट राजभट (हिन्दू)
23. जट (हिन्दू) (सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और अररिया जिलों के लिए)
24. मडरिया (मुस्लिम) (मात्र भागलपुर जिला के सन्हौाला प्रखंड एवं बांका जिला के धोरैया प्रखण्डr के लिए)
25. दोनवार (केवल मधुबनी और सुपौल जिलों के लिए)
26. सुरजापुरी मुस्लिम (शेख, सैयद, मल्लिक, मोगल, पठान को छोडकर) (केवल पूर्णियां, कटिहार, किशनगंज एवं अररिया जिलों के लिए)
27. मलिक (मुस्लिम)
28. राजवंशी(रिसिया एवं पोलिया 29. छीपी
30. गोस्वामी, सन्यासी, अतिथ /अथित, गोसाई, जति/यती
31. ईटफरोश/ईटाफरोश /गदहेडी 32. सैंथवार
33. किन्नर/कोथी/हिजड़ा/ट्रांसजेन्डर
1. कपरिया 2. कानू 3. कलन्दर 4. कोछ 5. कुर्मी (महतो) 6. केवट (कउट) 7. कादर 8. कोर 9. कोरकू 10. केवर्त 11. खटवा 12. खतौरी 13. खंगर 14. खटिक 15. खेलटा 16. गोड़ी (छावी) 17. गंगई (गणेश) 18. गंगोता 19. गंधर्व 20. गुलगुलिया 21. चांय 22. चपोता 23. चन्द्रवंशी(कहार, कमकर) 24. टिकुलहार 25. ढेकारू 26. तमरिया 27. तुरहा 28. तियर 29. धानुक 30. धामिन 31. धीमर 32. धनवार 33. नोनिया 34. नाई 35. नामशुद्र 36. पाण्डी 37. पाल(भेड़िहार, गड़ेरी) 38. प्रधान 39. पिनगनिया 40. पहिरा 41. बारी 42. बेलदार 43. बिन्द 44. सेखड़ा 45. बागदी
46. भुईया 47. भार 48. भास्कर 49. माली (मालाकार 50. मांगर 51. मदार 52. मल्लाह 53. मझवार 54. मारकन्डे 55. मोरियारी 56. मलार (मालहोर) 57. मौलिक 58. राजधोबी 59. राजभर 60. रंगवा 61. वनपर 62. सौटा (सोता) 63. संतराश (केवल नवादा जिले के लिए) 64. अघोरी 65. अबदल 66. कसाब (कसाई) (मुस्लिम) 67. चीक 68. डफाली (मुस्लिम) 69. धुनिया (मुस्लिम) 70. धुनिया (मुस्लिम) 71. नट (मुस्लिम) 72. पमरिया (मुस्लिम) 73. भठियारा (मुस्लिम) 74. भाट (मुस्लिम) 75. मेहतर, लालबेगीया, हलालखोर, भंगी(मुस्लिम) 76. मिरियासीन, (मुस्लिम) 77. मदारी (मुस्लिम) 78. मोरशिकार (मुस्लिम) 79. साई/फकीर/दिवान/मदार (मुस्लिम) 80. मोमिन (मुस्लिम) (जुलाहा/अंसारी) 81. अमात 82. चुडीहार (मुस्लिम) 83. प्रजापति (कुम्हार) 84. राईन या कुंजरा (मुस्लिम) 85. सोयर 86. ठकुराई (मुस्लिम) 87. नागर 88. शेरशाहबादी 89. बक्खो (मुस्लिम) 90. अदरखी 91. छीपी 92. तिली 93. इदरीसी या दर्जी (मुस्लिम) 94. सैकलगर (सिकलगर) (मुस्लिम) 95. रंगरेज (मुस्लिम) 96. सिंदुरिया बनिया/कैथल वैश्य / कथबनिया 97. मुकेरी (मुस्लिम) 98. ईटफरोश/र्इटाफरोश/गदहेड़ी/ईटपज इब्राहिमी (मुस्लिम) 99. बढई 100. पटवा 101. कमार (कर्मकार) 102. देवहार 103. सामरी वैश्य 104. हलुवाई 105. पैरघा/परिहार 106. जागा 107. लहेरी 108. राजवंशी( रिसिया/देशिया या पोलिया 109. कुल्हैया 110. अवध बनिया 111. बरई, तमोली (चौरसिया) 112. तेली (हिन्दु एवं मुस्लिम) 113. दांगी
SC = Scheduled Castes “अनुसूचित जाति”  लगभग 22 जातियाँ जो निम्न है। – Bihar Caste Census 2022ST = Scheduled Tribes “अनुसूचित जनजाति”  लगभग 29 जातियाँ जो निम्न है। – Bihar Caste Census 2022
1. बन्तार
2. बौरी
3. भोगता
4. भुईया
5. चमार, मोची
6. चौपाल
7. दबगर
8. धोबी
9. डोम, धनगड
10. दुसाध, धारी, धारही
11. घासी
12. हलालखोर
13. हरि, मेहतर, भंगी
14. कंजर
15. कुररियार
16. लालबेगी
17. मुसहर
18. नट
19. पान, स्‍वासी
20. पासी
21. रजवार
22. तुरी
1. असुर,अगरिया
2. बैगा
3. बेदिया
4. बिनझिया
5. बिरहोर
6. बिरजिया
7. चेरो
8. चिकबरैक
9. गोंड
10. गोरेत
11. हो
12. करमाली
13. खरिया, धेलकी खरिया, दूध खरिया, हिल खरिया
14. खरवार
15. खोंड
16. किसान, नगेसिया
17. कोरा, मुदी- कोरा
18. कोरवा
19. लोहार, लोहरा
20. माहली
21. माल पहाडिया, कुमारभग पहाडिया
22. मुण्डा, पतार
23. धांगर/धनगर (उराँव)
24. परहैया
25. संताल
26. सौरिया पहाडिया
27. सावर
28. कवार
29. कोल
GEN = General Caste “सामान्य जाती” लगभग 7 से ज्यादा जातीयाँ आती है जिनमे से कुछ निम्न है। – Bihar Caste Census 2022EWS = ECONOMICALLY WEAKER SECTION “आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग” = 9 – Bihar Caste Census 2022
1. भूमिहार
2. राजपूत
3. ब्राम्हण
4. कायस्थ
5. बरनवाल
6. ठाकुर
7. जाट
1. ब्राह्मण
2. भूमिहार
3. राजपूत
4. कायस्थ
5. शेख
6. पठान
7. खत्री
8. सिंधी
9. सैयद

विभिन्न जातियों की सूचना आरटीपीएस के आधार पर दी गई है।
विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग के लोगो का सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास | 

इन्हे भी जाने

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Bihar Caste Census 2022

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One thought on “Bihar Caste Census 2022 | बिहार जातीय जनगणना 2022 In Hindi Full Detail

  • August 7, 2022 at 7:19 am
    Permalink

    Bihar जाती के बारे में सब कुछ एक जगह आसान शब्दों में

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