Ajgaivinath Mandir Sultanganj Bihar Detail In Hindi

Post’s Name : – Ajgaivinath Mandir Sultanganj Bihar Detail In Hindi |अजगैबीनाथ महादेव मंदिर :सुल्तानगंज

बिहार का इतिहास गौरवमई रखना है एवं रहेगा जिसका उल्लेख वेदम पुराना एवं महाकाव्यों में मिलता है पर्यटन का बिहार से संबंध गहरा है धर्म अध्यात्म के मामले में इस प्रदेश का कोई जवाब नहीं है समय-समय पर लगने वाले मेले के कारण इसकी महत्ता में वृद्धि होती जा रही है।इसी क्रम में प्रतिवर्ष लगने वाला सुल्तानगंज का “श्रावणी मेला” है।


सुल्तानगंज भारत के बिहार राज्य के भागलपुर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है इसका संबंध रामायण काल से भी है। पटना से इस धार्मिक नगर की दूरी ट्रेन से 197 किलोमीटर पूर्व एवं भागलपुर से 25 किलोमीटर पश्चिम में है यह छोटा शहर गंगा नदी के तट पर बसा है

यहां गंगा उत्तरवाहिनी है जिसके बीच भाग में ग्रेनाइट पत्थर की विशाल चट्टान पर स्वयंभू भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है इस मंदिर को अजगैबीनाथ महादेव मंदिर कहा जाता है यहां पर आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है तट पर से देखने पर यह मंदिर बादलों में तैरता हुआ प्रतीत होता है गंगा का उत्तर वाहिनी प्रवाह के कारण इस जगह का महत्व काफी खास हो जाता है जो धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदाई है इसके तट पर से सावन माह में  भक्त कांवर लेकर देश के विभिन्न भागों से आकर गंगाजल भरकर झारखंड राज्य में देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाते हैं एवं बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर आपनी समस्त मनोकामना पूरी करते है।

वैद्यनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है पौराणिक कथा रावण से जुड़ी है इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को रावणेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

सुल्तानगंज का धार्मिक महत्त्व:

सुल्तानगंज एक प्राचीन बौद्ध धर्म का केंद्र रहा है इसका पता 1853 ईसवीं में रेलवे-स्टेशन के निर्माण के समय 2 मीटर ऊँची 3 टन वजनी ताम्र से बनी बुद्ध की प्रतिमा प्राप्त होने से हुई। जो वर्तमान में ब्रिटेन के बर्मिंघम संग्रहालय में रखी गई है इसके अलावा प्राचीन कथा के अनुसार जब भागीरथ के अथक प्रयास से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई तो गंगा के वेग को रोकने के लिए साक्षात भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटा में समाहित कर लिया जिससे गंगा विलुप्त हो गयी।

देवताओं की प्रार्थना पर गंगा को धरती पर अवतरित कर दिया अपने चंचल एवं निर्मल प्रवाह से बहती हुई गंगा जब सुल्तानगंज क्षेत्र में आयी तब यहां पर महान तपस्वी जहांगीर मुनि तपस्या कर रहे थे गंगा के बहाव से उनकी तपस्या में विघ्न उत्पन्न हो गई जिससे क्रोध में आकर मुनि ने गंगा को अपनी जांघ में समा लिया जिससे गंगा पुनः विलोपित तो हो गई देवताओं के मनाने पर ऋषि ने गंगा को प्रवाह के लिए धरती पर अवतरित कर दिया इसी स्थान पर से गंगा का प्रवाह इस क्षेत्र में उत्तरवाहिनी हो गया है।

जिससे इस क्षेत्र के गंगा नदी के तट का महत्त्व अत्यधिक हो गया है सावन माह में इस नगरी का विशेष महत्व हो जाता है सभी शिवभक्त गेरुआ वस्त्र धारण कर कांधे पर कांवर में जल भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके देवघर में स्थित श्री वैद्यनाथ का मंदिर में जाकर जलाभिषेक करते हैं एवं अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए वर मांगते हैं।


   प्राचीन कथा के अनुसार प्रथम कावड़ यात्री के रूप में भगवान श्री राम की कावड़ यात्रा प्रचलित है जो सबसे पहले उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर पैदल कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के मंदिर गए थे तभी से के लोगों में सावन माह का विशेष महत्व है और यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है

लोगों ने इसे अब तक जारी रखा है।केवल कोविड-19 की वजह से वर्ष 2020 एवं 2021 में कांवर यात्रा पर रोक लगी थी पर 2 वर्ष बाद 2022 में यह यात्रा शुरू की जा रही है। जिसके लिए प्रशासन के द्वारा व्यापक एवं उच्च स्तर पर प्रबंध किए जा रहे हैं।

सुल्तानगंज आने के लिए यातायात के साधन:

सुल्तानगंज शहर वर्ष भर जिला मुख्यालय भागलपुर, राजधानी पटना से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा रहता है। इसके अलावा या शहर पूर्व रेलवे के द्वारा देश के प्रमुख शहर दिल्ली, मुंबई, गुजरात ,बेंगलुरु, कोलकाता से जुड़ा हुआ है।


वर्तमान समय में इस शहर तक पहुंचना अत्यंत सरल हो गया है। अब यह शहर रेलवे के माध्यम से मुंगेर के रास्ते बरौनी, दरभंगा ,जयनगर होते हुए नेपाल तक आसानी से जुड़ा है इसके अलावा भागलपुर वाया बाराहाट वाया बांका रेलवे लाइन से बाबा बैद्यनाथ धाम जुड़ गई है।

वर्तमान में सुल्तानगंज शहर से सुबह 6:20 पर देवघर के लिए सीधी सेवा का परिचालन शुरू हो गया है जिससे भक्तों को दर्शन करने में अत्यंत ही सुविधा का अनुभव हो रहा है।


सड़क मार्ग से यह मुंगेर बांका पूर्णिया जमुई के रास्ते अन्य जगहों से जुड़ा हुआ है वर्तमान में मुंगेर स्थित श्रीकृष्ण सेतु के माध्यम से यह शहर उत्तरी बिहार के शहर से सुगमता से जुड़ गया है जिससे शिव भक्तों को यहां पहुंचने में अत्यंत ही सुखद अनुभव का सामना होगा।


हवाई मार्ग के द्वारा यह शहर दूर है नजदीकी हवाई अड्डा पटना, देवघर है इसके अलावा भागलपुर हवाई पट्टी , मुंगेर हवाई पट्टी एवं पूर्णिया हवाई पट्टी से जुड़ा हुआ है परंतु नियमित परिचालन नहीं होने की वजह से हवाई सेवा से यहां तक पहुंचना अभी सरल कार्य नहीं है।

अजगैविनाथ धाम तक पहुंचने के लिए ट्रेन सेवा

जगह का नामउपलब्ध रेल सेवा
पटना से सुल्तानगंज ट्रेन12368 विक्रमशिला दैनिक,
13236 रविवार को छोड़कर
22406 गरीब रथ एक्सप्रेस
15647 गुवाहाटी एक्सप्रेस
12336 लोकमान्य तिलक भागलपुर
22947 सूरत भागलपुर एक्सप्रेस
14004 दिल्ली मालदा टाउन एक्सप्रेस
13402 दानापुर भागलपुर दैनिक
13414 पुरानी दिल्ली फरक्का एक्सप्रेस
13484 पुरानी दिल्ली फरक्का एक्सप्रेस
13242 बांका इंटरसिटी शनिवार को छोड़कर
मुंबई से बाबा अजगैबीनाथ धाम रेल सेवा12336 लोकमान्य तिलक भागलपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस सप्ताह में 3 दिन
15647 लोकमान्य तिलक गुवाहाटी सप्ताह में 1 दिन
सूरत से सुल्तानगंज बाबा अजगैबीनाथ धाम रेल सेवा22947 सूरत भागलपुर एक्सप्रेस सप्ताह में 2 दिन
गांधीधाम से सुल्तानगंज बाबा अजगैबीनाथ धाम रेल सेवा:
09451 गांधीधाम सुल्तानगंज एक्सप्रेस सप्ताहिक
कोलकाता से सुल्तानगंज के बीच रेल सेवा13015 हावड़ा जमालपुर कविगुरु एक्सप्रेस दैनिक
13031 हावड़ा जयनगर एक्सप्रेस दैनिक
13023 हावड़ा गया एक्सप्रेस दैनिक
13071 हावड़ा जमालपुर एक्सप्रेस दैनिक
बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर से बाबा अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज रेल सेवा:03633 देवघर सुल्तानगंज डीएमयू पैसेंजर रविवार को छोड़कर
15625 देवघर अगरतला एक्सप्रेस सप्ताहिक सावन माह में ठहराव सोमवार को
जम्मू तवी से सुल्तानगंज :15098 अमरनाथ एक्सप्रेस सप्ताहिक मंगलवार को
रांची से सुलतानगंज18603 सप्ताह में 3 दिन
बेंगलुरु से बाबा अजगैबीनाथ सुल्तानगंज रेल सेवा 12253 अंग एक्सप्रेस केवल शनिवार को सावन माह में ठहराव
संगम नगरी प्रयागराज से बाबा अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज रेल सेवा12350 नई दिल्ली गोड्डा वीकली हमसफर एक्सप्रेस बुधवार को वाया गया
22406 आनंद विहार नई दिल्ली भागलपुर एक्सप्रेस सप्ताह में 3 दिन
15657 ओल्ड दिल्ली कामाख्या ब्रह्मपुत्र मेल वाया पटना जमालपुर दैनिक
काशी विश्वनाथ धाम वाराणसी से बाबा अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज सेवा:14004 नई दिल्ली मालदा टाउन एक्सप्रेस सप्ताह में 2 दिन
13414 फरक्का एक्सप्रेस
13484 फरक्का एक्सप्रेस

उपरोक्त नियमित रेल सेवा के अलावा रेलवे द्वारा श्रावण मास में विशेष रेलगाड़ी चलाई जाती है पिछले विगत वर्ष की भांति इस बार भी देवनगरी को जोड़ने के लिए विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन 14 जुलाई से प्रारंभ किया जाएगा जो 12 अगस्त तक संचालित होगा।

सुल्तानगंज श्रावणी मेला 2022 क्यों होगा खास?

कोरोना महामारी 2019 के 2 साल बाद श्रावणी मेला का आयोजन सुल्तानगंज में वर्ष 2022 में 14 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा इसके मद्देनजर सुल्तानगंज में तैयारियां जोर-शोर से चल रही है 2 वर्ष के बाद शुरू होने वाले मेला में इस वर्ष कांवरियों को गंगा घाट मंदिर परिसर एवं पूरा शहर नया लुक में देखने को मिलेगा।


नमामि गंगे परियोजना के तहत सुल्तानगंज में एक नया जहाज घाट का निर्माण किया गया है जिसका संचालन एवं उद्घाटन इसी मेले से होगा जहाज घाट के बन जाने से मेला के दौरान गंगा का पानी सीढ़ी तक आसानी से पहुंच जाएगा।

इससे कांवरियों को जल भरने में सहूलियत होगी विगत वर्षों की भांति पिछड़न वाले घाट से निजात मिलेगा बाबा अजगैबीनाथ के दर्शन में कांवरियों को कोई दिक्कत नहीं होगी रोशनी का समुचित प्रबंध किया गया है जिससे कांवरियों को दिन रात में फर्क महसूस नही होगा साफ सफाई की बेहतर व्यवस्था नगर परिषद सुल्तानगंज के द्वारा की गई है इसके लिए वेस्ट कलेक्शन को अपनाया गया है

सुरक्षा के मद्देनजर 3000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है कई मेला थानों का संचालन किया जा रहा है। मेला क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाने के लिए शहर को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।


श्रावणी मेला दो राज्य के मध्य चलने वाला लंबा मेला है जिसके कारण सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं मेला में किसी भी प्रकार के आतंकवादी या अप्रिय घटना को रोकने के लिए सादे लिवास निवास में  2 राज्यों की पुलिस सदैव तत्पर रहेगी शिव भक्तों के लिए जगह-जगह पर उत्तम चिकित्सा के साधन का प्रबंध किया गया है उनके ठहराव के लिए जगह-जगह पर धर्मशाला बनवाया गया है।

सड़क मार्ग के अलावा एक अन्य वैकल्पिक कच्चा मार्ग अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर तक बनवाया गया है ताकि पैदल कांवर यात्रियों को सफर में सहूलियत हो और वे वाहनों की चपेट में आने से बचे रहे।

बाबा अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर पैदल कांवर पथ पड़ाव: एवं उसके मध्य की दूरी:

सुल्तानगंज से कमराय 6 किलोमीटर
कमराय से असरगंज 7 किलोमीटर
असरगंज से तारापुर 8 किलोमीटर
तारापुर से रामपुर 7 किलोमीटर
रामपुर से कुमारसार 8 किलोमीटर
कुमारसार से चंदन नगर 10 किलोमीटर
चंदननगर से जिलेबिया मोर 8 किलोमीटर
जिलेबिया मोड़ से सुईया 8 किलोमीटर
सुईया से अबरखिया 8 किलोमीटर
अबरखिया से कटोरिया 8 किलोमीटर
कटोरिया से लक्ष्मण झूला 8 किलोमीटर
लक्ष्मण झूला से इनारावरण 8 किलोमीटर
इनारावरण से भूल भुलैया 3 किलोमीटर
भूल भुलैया से गोरियारी 5 किलोमीटर
गोरियारी से कोलकाता धर्मशाला 3 किलोमीटर
कोलकाता धर्मशाला से भूत बंगला 5 किलोमीटर
भूत बंगला के दर्शनिया 1 किलोमीटर
दर्शनिया से बाबा मंदिर 1 किलोमीटर=105 किलोमीटर

कांवरियों को मानने वाले सामान्य नियम सारे कांवरियों को अक्षर से पालन करना चाहिए:

सावन माह में कांवर यात्रा पर जाने वाले कांवरियों को शाकाहार भोजन करना चाहिए
वाणी में सच्चाई ही चाहिए मदिरा एवं धूम्रपान से दूर रहना चाहिए
श्रावण मास में नदी में स्नान करने समय तेल साबुन शैंपू से स्नान नहीं करना चाहिए
चमड़े से बना हुआ किसी भी प्रकार का सामान नहीं कैरी करना चाहिए
कांवर को जमीन पर नहीं रखना चाहिए
कांवड़ यात्रियों को सहन से और धैर्यवान होना चाहिए कांवर यात्रियों को आपसी सहयोग देना चाहिए

मेले में प्रतिदिन लाखों कांवरिया जल भरते हैं जिसकी वजह से प्रत्येक दिन हुजूम सा लगा रहता है इस को ध्यान में रखते हुए कांवरियों के निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए :

कांवरियों को महंगे सामान जैसे सोने चांदी या अन्य धातुओं से बने आभूषण पहनकर यात्रा नहीं करनी चाहिए।
किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर या इसकी सूचना होने पर तुरंत पुलिस सहायता केंद्र में संपर्क करना चाहिए।
गलत सूचना या अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

क्या आप जानते हैं कांवरिया कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: कांवरिया तीन प्रकार के होते हैं
1. पैदल कांवरिया
2. डाक बम कांवरिया
3. दंड बैठक कांवरिया
उपरोक्त उपरोक्त कांवरियों की निम्न विशेषताएं है।


पैदल कांवरिया: –  पैदल कांवरिया यात्रा को अपनी चाल के अनुसार 3 से 5 दिन या सप्ताह भर में पूरा करते हैं यह पैदल यात्री जगह-जगह पर बने यात्री शेड में विश्राम करते हैं खाना खाते हैं सोते है अर्थात सरल शब्दों में कहा जाए तो दैनिक दिनचर्या को पूरा करते हुए 1 दिन में कम से कम 15 से 20 किलोमीटर का सफर तय करते हैं।

डाक बम कांवरिया:- डाक बम कांवरिया विशेष प्रकार के कांवरिया होते हैं जो जल भरने के बाद 24 घंटे के अंदर ही बाबा धाम जाकर बाबा को अपना जल अर्पित करते हैं इनका पंजीयन कराया जाता है और यह लगातार चलते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं यह पैदल यात्रियों की तरह यात्री शेड में दिनचर्या का पालन नहीं करते श्रावण मास में डाक बम का प्रचलन सोमवार के दिन अधिक होता है। डाक बम में कृष्णा डाक बम अत्यंत प्रसिद्ध है।

दंड बैठक कांवरिया :- ये यह अत्यंत ही विशेष प्रकार के कांवर के होते इनका इनकी यात्रा योग पर आधारित है इनको अपनी यात्रा पूरी करने में महीनों से अधिक दिन का समय लगता है जब कोई भी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है तो वह बाबा को दंड बैठक करते हुए उनके चरणों में जाते हैं और अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।

क्या आपको पता है पहले कावड़ यात्री कौन थे?
श्री राम


श्रावण मास में ही कांवर यात्रा क्यों की जाती है?
पुराणों के अनुसार कांवर यात्रा का संबंध समुद्र मंथन से भी है कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन के उपरांत समुद्र से हलाहल विष निकला जो सृष्टि खतरे में पड़ गई सृष्टि को बचाने के लिए आदि देव महादेव रूद्र देव ने विष का पान किया लेकिन विष उनके कंठ में ही रह गई वह भी उलर तक नहीं जा सका।जिसकी वजह से वह नीलकंठ कहलाए इसका प्रभाव को कम करने के लिए सभी लोगों ने श्रावण मास में ठंडक पहुंचाने के लिए जलाभिषेक करना शुरू कर दिया। इसके अलावा भगवान शिव को सभी प्रकार के थे वस्तुओं का उपयोग लगाया जाता है।


श्रावणी मेला में सुल्तानगंज में ठहरने के साधन:
मेला के दौरान सुल्तानगंज में ठहरने का उत्तम प्रबंध रहता है यहां पर स्थाई एवं अस्थाई होटलों का होटलों की व्यवस्था है जिनमें इंद्रपुरी होटल,शिव वाटिका होटल,जयसवाल होटल प्रमुख है इसके अलावा यहां ठहरने के लिए लाॅज की उत्तम व्यवस्था है।
जय बम भोले 

2 thoughts on “Ajgaivinath Mandir Sultanganj Bihar Detail In Hindi

  • July 7, 2022 at 4:00 pm
    Permalink

    रोचक मार्गदर्शन मैप फॉर अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज

    Reply
  • July 12, 2022 at 1:17 pm
    Permalink

    ajgaibinath ke bare me sampurn evm unique suchana

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.